क्या एक मानसिक एपिसोड मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है?HealthPlanet

Posted on Tue 6th Dec 2022 : 11:21

Depression: जानें डिप्रेशन क्या है, इसके लक्षण, कारण और इलाज क्या हैं?
डिप्रेशन एक गंभीर समस्या है और अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, ध्यान न दिया जाए तो यह घातक हो सकती है. इस लेख में हम जानेंगे डिप्रेशन के लक्षण, कारण और

डिप्रेशन के लक्षण, कारण और इलाज

Depression: डिप्रेशन एक मूड डिसऑर्डर है, जो व्यक्ति में लगातार उदासी और अरुचि की भावना का कारण बनता है. इसे नैदानिक अवसाद भी कहा जाता है. आप कैसा महसूस करते हैं, क्या सोचते हैं और कैसा व्यवहार करते हैं, इन सब पर डिप्रेशन का असर पड़ता है. इसकी वजह से भावनात्मक और शारीरिक समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. डिप्रेशन में व्यक्ति को अपने दैनिक कार्य करने में भी परेशानी हो सकती है. कई बार तो व्यक्ति को ऐसा भी महसूस होने लगता है कि वह जी ही क्यों रहा है, वह जीने के लायक ही नहीं है. डिप्रेशन कोई साधारण सी भावनात्मक कमजोरी नहीं है, जिससे आसानी से बाहर निकला जा सके. डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए लंबे इलाज की आवश्यकता होती है. लेकिन आपको बिल्कुल भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है. कुछ दवाओं और साइकोथैरेपी की मदद से डिप्रेशन के पीड़ितों को बेहतर महसूस हो सकता है.


डिप्रेशन एक गंभीर डिसऑर्डर है, जिसका आप पर और आपके परिवार पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है. अगर डिप्रेशन का सही समय पर इलाज न किया जाए तो इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं. डिप्रेशन की वजह से व्यक्ति में भावनात्मक, व्यवहारिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आने लगती हैं, जो व्यक्ति के जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर सकता है.
डिप्रेशन की वजह से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं –

डिप्रेशन के कारण व्यक्ति का वजन बढ़ सकता है, वह मोटापे (Obesity) का शिकार हो सकता है. इससे वह आगे चलकर दिल की बीमारियों (Heart Disease) और डायबिटीज (Diabetes) का मरीज हो सकता है.
डिप्रेशन के कारण व्यक्ति शारीरिक दर्द और बीमार महसूस कर सकता है.
डिप्रेशन की वजह से कई लोग शराब और ड्रग्स के आदी बन जाते हैं.
चिंता, पैनिक डिसऑर्डर और सोशल फोबिया के शिकार हो सकते हैं.
परिवार और रिश्तों में दिक्कतें हो सकती हैं. यही नहीं काम और स्कूल में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. व्यक्ति सामाज से दूर होने लगता है
आत्महत्या के विचार आ सकते हैं और व्यक्ति इसकी कोशिश भी कर सकता है.
व्यक्ति स्वयं को नुकसान पहुंचा सकता है, वह अपने को किसी धारदार चीज से नुकसान पहुंचा सकता है.
चिकित्सीय स्थितियों के चलते व्यक्ति की समय से पहले मौत हो सकती है.

डिप्रेशन के लक्षण – Symptoms of Depression in Hindi

डिप्रेशन यानी अवसाद भले ही जीवन में एक बार हो, लेकिन इसके कई एपिसोड हो सकते हैं. इन एपिसोड्स के दौरान निम्न लक्षण लगभग रोज और दिन के ज्यादातर समय देखने को मिलते हैं –

उदासी, अशांति, खालीपन और निराशा का भाव.
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन और निराशा के भाव आना.
सेक्स, हॉबी और खेल जैसे अधिकांश या सभी सामान्य गतिविधियों में रुचि खोना.
नींद में गड़बड़ी, अनिद्रा या बहुत अधिक सोना भी एक लक्षण है.
थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होना, छोटे-छोटे कार्यों को भी पूरा करने में ज्यादा ऊर्जा लगना.
भूख कम लगना, वजन कम होना, खाने के लिए इच्छा बढ़ना और वजन बढ़ना.
चिंता और बेचैनी के साथ ही विद्रोही स्वभाव.
व्यक्ति की सोचने, बोलने और शारीरिक गतिविधिया धीमी होना.
स्वयं को तुच्छ समझना, हीन भावना आना, अपराधबोध होना पूर्व की असफलताओं के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराना.
सोचने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और चीजों को याद रखने में परेशानी महसूस होना.
बार-बार मृत्यु का विचार आना, आत्महत्या के विचार आना और कोशिश करना.
बिना किसी कारण सिरदर्द और कमर दर्द महसूस होना.
डिप्रेशन बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा नहीं है. इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. चिंताजनक यह है कि ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों में डिप्रेशन का निदान और उपचार नहीं होता है. वह मदद लेना भी नहीं चाहते हैं. वृद्ध वयस्कों में अवसाद के लक्षण अलग हो सकते हैं या हो सकता है वह स्पष्ट न हों.
याद रखने में समस्या होना या व्यक्तित्व में परिवर्तन होना.
थकान महसूस होना, भूख न लगना और नींद न आना.
बाहर जाने की बजाय घर पर ही रहने का मन करना.

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण – Depression symptoms in children and teens

बच्चों और टीनएजर्स में भी डिप्रेशन के लभण बालिगों की तरह ही होते हैं, लेकिन कुछ लक्षण जो अलग हो सकते हैं उनके बारे में हम यहां बता रहे हैं –

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षणों में उदासी, चिड़चिड़ापन, अकड़न, चिंता, दर्द और पीड़ा के साथ ही स्कूल जाने से इनकार करना और वजन कम होना भी शामिल हैं.
बढ़ते बच्चों यानी टीनएजर्स में ऊपर बताए लक्षणों के अलावा नारात्मक विचार, गुस्सा, स्कूल न जाना, स्वयं को नुकसान पहुंचाना, साधारण गतिविधियों में रुचि न होना और समाजिक संपर्क से दूर रहना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

डिप्रेशन के कारण – Causes of Depression in Hindi

डिप्रेशन क्यों होता है, इसके कारण तो ठीक ज्ञात नहीं हैं. लेकिन कई अन्य मानसिक विकारों की तरह ही इसमें भी कई कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे –

बायोलॉजिकल डिफ्रेंसेस – अवसाद ग्रस्त लोगों के दिमाग में फिजिकल परिवर्तन हो सकते हैं. इन परिवर्तनों का महत्व और कारण अब भी अनिश्चित हैं, लेकिन डिप्रेशन के कारणों की ओर इशारा करने में मदद कर सकता है.
ब्रेन केमिस्ट्री – न्यूरोट्रांसमीटर स्वाभाविक रूप से मस्तिष्क के रसायन होते हैं, जो संभवत: अवसाद में भूमिका निभाते हैं.
हार्मोन्स – शरीर में हार्मोन के संतुलन में परिवर्तन अवसाद का कारण बन सकता है. हार्मोन में इस तरह का परिवर्तन गर्भवास्था के कारण, प्रसव के कुछ हफ्तों या महीनों के बाद (Postpartum), थायराइड की समस्या, रजोनिवृत्ति (Menopause) या अन्य कारणों से हो सकता है.
पारिवारिक इतिहास – यदि आपके परिवार या खून के रिश्ते में कोई डिप्रेशन से पीड़ित रहा है तो आपके भी अवसादग्रस्त होने की आशंका है. शोधकर्ता अवसाद का कारण बनने वाले जीन की खोज कर रहे हैं.

डिप्रेशन से बचाव – Prevention of Depression in Hindi

डिप्रेशन से बचने का कोई निश्चित तरीका तो नहीं है, लेकिन निम्न कुछ तरीकों को अपना कर आप डिप्रेशन से बच सकते हैं –

तनाव को नियंत्रित करें. इससे आप अपने लचीलेपन और आत्मसम्मान को बढ़ा सकते हैं.
अपने दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहें. खासतौर पर संकट के समय आपको बुरे दौर से निकालने में ये लोग मदद करते हैं.
डिप्रेशन का पहला लक्षण दिखने पर इसके और बिगड़ने से पहले जल्द से जल्द इलाज करवा लें.
लक्षणों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उचित इलाज प्रक्रिया को अपनाएं.

डॉक्टर को कब दिखाएं – When to see a doctor

अगर आप उदासी महसूस कर रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द अपने डॉक्टर या मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. अगर आप इलाज नहीं कराना चाहते या डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं तो अपने किसी दोस्त या घर-परिवार में करीबी से बात करें. आप चाहें तो किसी आध्यात्मिक गुरु या ऐसे व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं, जिस पर आपको बहुत प्रभाव हो.
डिप्रेशन का इलाज – Treatment of Depression

अवसाद से पीड़ित अधिकांश लोगों में दवाएं और मनोचिकित्सा (Psychotherapy) प्रभावी साबित होती हैं. आपके नियमित डॉक्टर या मनोचिकित्सक लक्षणों से राहत पाने के लिए आपको दवाएं दे सकते हैं. हालांकि, अवसाद पीड़ित कई लोगों को मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक और अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर को दिखाने से लाभ मिल सकता है. अगर आप गंभीर रूप से अवसाद में हैं तो आपको कुछ दिन अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता पड़ सकती है. यहा हो सकता है आपको लक्षणों में सुधार होने तक आउटपेशेंट ट्रीटमेंट प्रोग्राम में रहना पड़ सकता है.

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